लंड चटाई का मज़ा-4

गतांग से आगे …. भैया और रीता ने एक दूसरे की तरफ चोंक के देखा . भैया तुरंत खड़े हो गये और रीता से बोले : “जल्दी से अपने कपड़े पहन, मैं देखता हू दरवाजे पे कौन है “| रीता ने जैसे ही उठने की कोशिश की तो , दर्द से कराह उठी , उसकी चूत पहली चुदाई की वजह सूज गयी थी और काफ़ी दर्द कर रही थी .भैया ने जब रीता की हालत देखी तो आगे आ कर उसका हाथ पकड़ कर उसे उठने मे मदद करने लगे|

इस बीच दरवाजे पे दस्तक लगातार हो रही थी| रीता जल्दी-2 अपने कपड़े पहनने लगी, उसके चेहरे को देख के साफ लगा रहा था कि उसे कपड़े पहनने मे काफ़ी दर्द हो रहा था.किसी तरह रीता ने अपने कपड़े पहने , भैया अब तक दरवाजे तक पहुच चुके थे उन्होने थोड़ा सा दरवाजा खोल के पूछा “कौन है “. बाहर से किसन की आवाज़ आई “अबे! मैं हू जल्दी से दरवाजा खोल “. भैया को अब थोड़ा चैन मिला , वो दरवाजा खोलते हुए बोले “साले तूने तो डरा ही दिया , कहाँ रह गया था.”

किसन अंदर आते हुए बोला “आरे यार! मा ने कुछ काम दे दिया था, रीता कहा है.” रीता कमरे के एक कोने मे सर झुकाए , अपनी चूत पे एक हाथ रखे खड़ी थी. किसन बोला “वाहा क्यू खड़ी है मेरी जान , मेरे पास आ ना “. भैया दरवाजा बंद करते हुए मुड़े , तब तक किसन रीता के पास पहुच चुका था. भैया कुछ बोलने ही वाले थे कि तभी रीता की आवाज़ आई “किसन मुझे घर जाना है , छोड़ो मुझे “.

किसन बोला “ऐसे कैसे जाने दू, कितनी मेहनत से तू हाथ आई है “, कहते हुआ किसन ने रीता की एक चुचि उपर से ही पकड़ ली और ज़ोर से दबाने लगा. रीता दर्द से छटपटा उठी और मासूम नज़रो से भैया को देखने लगी.भैया को रीता की हालत पे तरश आ रहा था. वो आगे बढ़ते हुए बोले”किसन छोड़ ना यार, तू फिर कभी कर लेना”.

किसन रीता की चुचि को हाथ मे पकड़े हुए ही बोला ” क्या, ये क्या कह रहा है तू”.भैया बोले”समझा कर ना यार , उस बेचारी को बहुत दर्द हो रहा होगा, आज पहली बार था ना”. किसन आस्चर्य से रीता की तरफ मुड़ते हुए बोला “”क्या ये साली कुवारि थी अभी तक , तुझे कैसे पता ” भैया ने बिस्तर की तरफ इशारा करते हुए किसन को रीता की चूत से निकला हुआ खून दिखाया . किसन बोला “अबे ये तो सच मे कुवारि थी, मुझे तो लग रहा था साली पहले से चुदवाती होगी “.

किसन फिर रीता की तरफ मुड़ा “साली , मुझे अगर पता होता कि तू कुवारि है तो , तो आज तेरी चूत मैने ही फाडी होती.. जय को तुझे हाथ भी नही लगाने देता.” भैया , किसन की इस बात पे थोड़ा मुस्कुरा दिए. किसन बोला “चल कोई बात नही , जय ने तेरी नाथ उतारी तो…लेकिन तेरी चूत मे दूसरा लंड मैं ही डालूँगा.” रीता , किसन की बातो से थोडा डर गयी और घबराते हुए बोली “किसन , मुझे जाने दो , मुझे बहुत दर्द है……जय तुम बोलो ना किसन से”. भैया , ने किसन के कंधे पे हाथ रखते हुए बोले “यार किसन , जाने दे इसे आज , तू कल कर लेना “. किसन ने रीता की चुचि को ज़ोर से दबाते हुए कहा “नही …..मैं तो आज की चोदुन्गा इसे, पता नही साली कल आएगी भी या नही. ” भैया बोले ” यार आएगी कल भी……..क्यू रीता कल आओगी ना.” रीता ने भी कोई रास्ता नही देखते हुए हा मे सर हिला दिया. किसन ने जब देखा रीता कल आने के लिए मान गयी है , तो उसने रीता को छ्चोड़ दिया और कहा “कल आएगी ना वादा कर पहले तभी जाने दूँगा”. रीता ने सर झुकाए हुए धीरे से कहा ” हा….. कल आउन्गि.”. किसन बोला “चल जा तू भी क्या याद करेगी, ……और सुन गरम पानी करके अपनी चूत सेक लेना अच्छे से दर्द कम हो जाएगा .” रीता ने सहमति मे सर हिला दिया ,और दरवाजे को खोल के बाहर जाने लगी….

मैने जब देखा रीता बाहर जा रही है ,, तो मैं भी जल्दी से वाहा से घर की और जाने लगा…जाते-2 मैने सुना किसन कह रहा था “अबे तू कहा जा रहा है……..मुझे पूरी बात तो बता तूने रीता की कुवारि चूत कैसे फाडी….”.भैया , शायद किसन को पूरी बात बताने लगे थे…..मैं जल्दी से वाहा से भाग के सड़क पे आ गया, मुझे दर था कही रीता ना मुझे वाहा देख ले ….मैं भागते हुए अपने घर के पास पहुच चुका था……… मैं जब घर के पास था तो मुझे थोड़ी दूरी पे रीता आते हुए नज़र आई .

वो काफ़ी धीरे-2 चल रही थी…उसे चलने मे भी काफ़ी दिक्कत हो रही थी.. मैं उसे देखता रहा ….थोड़ी देर मे वो मेरे पास से गुज़री और अपने घर के दरवाजे के अंदर चली गयी….उसने मुझे सर उठा के देखा भी नही…..जब रीता घर के अंदर चली गयी तो मैं भी अपने घर मे घुस गया..जैसे ही मैं घर मे घुसा , मा ने मुझे देखते ही डाँटते हुए कहा “कहाँ रह गया था……कब से तेरी राह देख रही हू”… मा की आवाज़ सुन के मैं थोड़ा डर गया मैने हकलाते हुए कहा “मा …..मैं ..वो ….”. मा ने मेरे पास आते हुए कहा “दिन भर धूप मे खेलता रहता है…..बीमार पड़ गया तो.”.

कहते हुए मा अपने आचल से मेरे माथे का पसीना सॉफ करने लगी….फिर बोली “हाथ मूह धो ले मैने तेरे लिए खीर बनाई है …..तुझे पसंद है ना .”..मैने मुस्कुराते हुए अपना सर उपर करके हा मे हिलाया..और बाथरूम की तरफ चल दिया..थोड़ी देर बाद जब बाहर आया तो मैने देखा …मा अपने हाथो मे खीर का कटोरा ले के मुझे अपने पास बुला रही थी…मैं जल्दी से मा के पास गया और मा की गोंद मे बैठ गया….मा ने प्यार से मेरे सर पे पप्पी की और अपने हाथो से खीर खिलाने लगी………..

सच मानिए मेरे लिए वो स्वर्ग से बढ़ के था वो एहसाह…….अब तो अपनी मा के पास रहने का भी मौका नही मिलता……..मैं मा के प्यार और दुलार के आगे थोड़ी देर पहले हुए सारी घटनाए भूल खीर का मज़ा ले रहा था………तभी जय भैया घर के अंदर आए और बोले “चाची ….खाना लगा दो बहुत भूक लगी है.”….मा ने भैया की आवाज़ सुन के कहा “तुम हाथ मूह तो लो मैं अभी तुम्हारे लिए खाना लगा देती हू “….कहते हुए मा ने मुझे अपनी गोंद से उठने का इशारा किया और बोली”बेटा ! बाकी तू खुद खा मैं ज़रा भैया को खाना दे के आती हू ……ठीक है”…..मैने उठते हुए हा मे सर हिला दिया और मा कमरे के बाहर चली गयी……..जय भैया को देख के मुझे सारी घटनाए फिर से एक बार याद आ गयी…….और मैं थोड़ा सा मुस्कुरा उठा और खीर का मज़ा लेने लगा.

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