लंड चटाई का मज़ा-1

दोस्तों अपनी यादो मैं डूबते ही मुझे मेरा बचपन याद आता है! मेरी सेक्स नामक शब्द से पहचान भी तभी हुई थी! मैं एक जमींदार परिवार से संम्बंद रखता हू| मेरा कोई भाई या बहन तो नहीं थे परन्तु हम एक सयुंक्त परिवार मैं रहते थे तो मेरे काफी चचेरे भाई बहन थे| हम सब एक साथ ही रहते थे |मेरा परिवार काफी बड़ा था, एक हवेली मैं सभी लोग रहते थे | मेरे दादा जी परिवार तथा गांव दोनों के मुखिया थे | चुकी मैं उनके छोटे बेटे की इकलोती संतान था वो मुझे बहुत प्यार करते थे | मैं उनके पास ही ज्यादा रहता था | मुझे अच्छी तरह याद है तब मैं मात्र 19 साल का था |जब मैंने किसी को सेक्स करते पहली बार देखा था, मुझे ये तब पता नहीं था की वो लोग क्या कर रहे है , लेकिन उनकी बाते सुन कर मुझे काफी अच्छा लगा था | उस दिन रविवार था यानि हमारे स्कूल कि छुट्टी थी ,मैं यूही गांव में घूम रहा था , माँ ने सुबह ही कहा था “बेटा ज्यादा दूर मत जाना घूमने घर जल्दी आ जाना ,मैंने तुम्हारी पसंद ही खीर बना रही हू .” मैं बहुत खुश था उस दिन. मैं टहलते -२ पास के school तक चला गया था. | चुकी सुबह के १० बज रहे थे , पूजा खतम हो चुकी थी, इसलिए कोई था नहीं| मैं school कि सीडियों पे बैठ गया , ओर कुछ गुनगुनाने लगा | तभी मेरी नजर school के पीछे जाते कुछ लडको पर पड़ी

| ध्यान से देखा तो वो मेरे बड़े पिता जी का लड़का जय था ,उसके साथ उसका दोस्त किसन भी था |दोनों की उम्र 19 साल थी ,दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे | किसन के पिता हमारे यहाँ मुंसि का काम करते थे | दोनों काफी खुश लग रहे थे , थोड़ी देर बाद दोनों school के पीछे बने छोटे से कमरे में चले गए | वो कमरा वहां के पुजारी का था चुकी उस समय कोई school में पुजारी नहीं था ,कुछ महीनो पहले ही पुजारी महाराज की मृत्यु हुई थी, वो कमरा खाली पड़ा था| वो दोनों कमरे के अंदर जा चुके थे , मुझे उनपे कोई सक भी नहीं था ,मैं तो एक नादाँन लड़का था उस समय | मैं थोड़ी देर मैं घर को जाने ही वाला था कि तभी एक लड़की मुझे उस कमरे की तरफ जाती हुई दिखी ,मैंने देखा वो हमारे घर के पीछे रहने वाले माली कि बेटी रीता थी| मेरी उत्सुकता बढने लगी ,वो क्या करने जा रही है उस कमरे में | मैंने सोचा वो लोग कोई खेल खेलने वाले है वह, मैं नादान उस कमरे की तरफ जा ही रहा था की , रीता उस कमरे में घुस गयी, उसके घुसते ही दरवाजा बंद हो गया| मैं तब तक उस कमरे तक पहुच चूका था, मैं दरवाजा खटखटाने ही वाला था की मुझे उंदर से हसने कि आवाज आई .

मेरी उत्सुकता अंदर से आती हँसी सुनकर बढती जा रही थी, पहले मैंने सोच दरवाजा खटखटाउ |फिर मन मैं आया देखता हू ये लोग अंदर कौन सा खेल खेल रहे है, अब मैंने कोई खिडकी या सुराग ढूढने लगा| इस बीच अंदर से बार-२ आवाजे आ रही थी | रीता : “छोड़ो ना क्यों तंग कर रहे हो ,मैंने जो कहा था लाए या नहीं , रुको तो ऐसे तो फट जायेगी ……..रुको” जय :”मेरी जान , तुने एक मागा था मैं तेरे लिए दो ले आया हू , तू आराम से खा इसे हमें हमारा काम करने दे ………..” रीता :”दो लाए हो तो तुम भी तो दो हो , रुको पहले मुझे एक खा लेने दो फिर मैं निकालूंगी.” किसन :”तू दोनों खा आराम से किसने रोका है तुझे, हमें हमारा काम करने दे.” तभी मुझे लगा अंदर कोई किस ले रहा,,,,,,,,,,,एक -दो -तीन …….उसके बाद मैंने गिनती करना छोड़ दिया. तब तक मैं कमरे के पीछे पहुच चूका था | मेरी अभी तक समझ मैं नहीं आया था कि अंदर क्या चल रहा था. रीता क्या खाने कि बात कर रही थी , जय भैया ओर किसन किस काम कि बात कर रहे थे|

तभी मुझे कमरे में एक सुराख़ दिखाइ दिया ……जो सायद कमरा बनाते वक्त रह गया था| चुकी मेरी लम्बाई भी छोटी थी मैं वह तक नहीं पहुच पा रहा था| मेरी नजर पास पड़े ईट के ढेर पर गयी, मैंने कुछ को उठा कर सुराख़ के निचे रखा ताकि मैं सुराख से देख सकू अंदर क्या हो रहा है| मैं बहुत कोशिशो के बाद अंदर क्या हो रहा था देखने मैं कामयाब हो गया था | इस बीच अंदर से आती जय ,किसन ,रीता कि बाते मुझे लगातार सुनाई दे रही | जिसके मुताबिक जय भैया ने रीता को कुछ उतारने को कहा ओर रीता ने सायद हा कर दी थी| ईट पे पैर रखने के बाद मैं अंदर देखने की कोशिश करने लगा ,सबसे पहले मुझे जय भैया की पीठ नजर आई , उन्होंने अपनी कमीज उतार रखी थी |जैसे ही उनका सर नीचे हुआ मुझे किसन नजर आया | मुझे अब काफी कुछ साफ दिखने लगा था, मुझे लग रहा था उन दोनों के बीच मैं कोई है | तभी उन दोनों के बीच से मुझे रीता निकलती हुई दिखाई पड़ी| वो उन दोनों से थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गयी और हसने लगी |जय भैया किसन दोनों हँसते हुए उसकी तरफ बढे | रीता ने दोनों को रुकने का इशारा किया और कहा


रीता : “मुझे ये वाला आम खा लेने दो पहले उसके बाद तुम लोग जो कहोगे मैं करने को तैयार हू ,” तब नुझे पता चला वो किन दो की बात कर रही थी , अशल में जय भैया ने उसे आम का लालच दे कर वह बुलाया था ,उसके लिए दो आम लेकर गए थे| तभी जय भैया ने कहा “तू आराम से आम खा ना , हमें बस तेरे कपडे उतारने दे ” रीता : “मैं अपने कपडे नहीं उतारने वाली कल तुमने बहुत तंग किया था , मुझे अभी भी सीने में दर्द हो रहा है ” जय भैया थोडा मुस्कुराये फिर बोलो ” अरे आज आराम से करूँगे तुझे दर्द नहीं होगा क्यों किसन “. किसन ,जय भैया कि तरफ देख के मुश्कुराया ओर बोला “बिल्कुल रीता हम आराम से करेंगे ,तुझे दर्द नहीं होगा ” रीता : ” किसन तुम कहा थे कल …….जय ने बहुत तेजी से दबाया था मेरे सीने को , मुझे बहुत दर्द हुआ था ” किसन : “रीता तू बिलकुल चिंता मत कर मैं हू ना तुझे बिलकुल दर्द नहीं होने दूँगा ” ये कहते हुये भैया और किसन फिर से रीता के पास पहुच गए थे | तब तक रीता के हाथो का आम भी खत्म हो चका था |उसने दोनों को मुस्कुराते हुए देखा ओर अपना सर नीचे कर लिया| मेरी ज्यादा कुछ समझ मैं तो नहीं आ रहा थ उस समय लेकिन मुझे उनकी बाते सुनकर काफी अच्छा लग रहा था| इसी बीच मैंने देखा भैया ने रीता के होठो पे किस करना चालू कर दिया था ,ऐसा लग रहा था रीता के लिए पहली बार नहीं था ये सब,मुझे ये सब देखकर जरुर अजीब लग रहा था |

शयद भैया ने पहले भी रीता को आम के बहाने वहां बुलाया था | मैं ये सोच ही रहा था कि तभी किसन ने रीता कि शर्ट उतारने के लिए ऊपर से खीचना चाहा ,और रीता ने दोनों हाथ आसानी से ऊपर कर दिए , मेरे देखते -२ रीता कि शर्ट जमीन पर पड़ी थी ओर रीता दोनों के बीच कसमसा रही थी | मुझे अब काफी अच्छे से अंदर का नजारा दिखने लगा था |सायद सुराख़ छोटा होने कि वजह से तीनों मैं से कोई मुझे देख नहीं पाया था | तभी मैंने देखा किसन दोनों को छोड़ कर बाहर जा रहा है | भैया :” कहा जा रहे हो ” किसन :”एक बार बाहर देख कर आता हू कोई आ तो नहीं रहा है तुम अंदर से दरवाजा बंद कर लो मैं बाहर से बंद करके जा रहा हू ” भैया : “कितनी देर में आओगे ” किसन :”बस थोड़ी देर में आ रहा हू ” भैया : “ठीक है ” रीता ने माशुमियत से कहा :”किसन तुम मत जाओ , तुम चले जाओगे तो ये बहुत जोर से दबाएगा ” किसन को रीता कि माशुमियत पे तरश आया वो बोला : “तुम बिलकुल मत परेशान हो मैं अभी आया , मेरे आने तक जय कुछ नहीं करेगा ” फिर वो भैया से बोला : “मेरे आने तक तुम कुछ नहीं करोगे रीता के साथ ठीक है ” भैया ने मुश्कुराते हुए कहा :”ठीक है भाई कुछ नहीं करूँगा ,

अब तुम जाओ ” इसी के साथ किसन कमरे से बाहर चला गया ओर भैया अंदर से कमरा बंद करके रीता के पास आ कर बोले: “चल उधर बैठते है ” रीता ओर भैया दोने कमरे के कोने में रखे घास के ढेर पर पड़े बिस्तर पे बैठ गए………………….. थोड़ी देर तो दोनों के बीच कुछ नहीं हुआ …….तभी मैंने देखा रीता कसमसाती हुई बार-२ भैया का हाथ पकड़ रही थी और मना कर रही थी | भैया बार-२ उससे हाथ छुडा कर उसके सीने पर रख रहे थे | एक बार फिर जब रीता ने हाथ हटाया तो भैया ने कहा : “क्यों बार-२ हाथ हटा रही है मेरा करने दे ना !” रीता : “नहीं जब तक किसन नहीं आ जाता मैं कुछ नहीं करने दूंगी …….हटो तुम यहाँ से ” भैया : “क्यों कल तो बड़े मजे से दबवा रही थी आज क्या हुआ रानी ” रीता : “तुमने कल बहुत जोर से दबाया था अभी तक दर्द कर रहा है ” भैया : “अच्छा ठीक है आज आराम से करूँगा अब तो कपड़े उतार “………..अभी तक मेरी ये समझ में नहीं आया था कि भैया रीता का क्या दबाने कि बात कर रहे है |…..इसका जवाब मुझे जल्दी ही मिलने वाला था. भैया ने अपनी बात कहते हुआ एक बार फिर रीता के सीने पे हाथ रख्खा |रीता ने गुस्से मैं भैया को देखा ओर हाथ झटक दिया| रीता कि इस हरकत पर भैया थोडा गुस्सा हो गए ओर बोले : “ठीक है मैं जा रहा हू अब किसन से ही सब करवाना और वोही तुझे आम भी ला कर देगा .” रीता भैया की इस बात पर थोड़ी घबरा गयी क्युकी उसे पता था …..गावं में जो आम का बाग है वो हमारा ही है , ओर भैया ही उसे लाकर दे सकते है ……. रीता ने भैया का हाथ पकड़ा ओर मुशकुरा के बोली : “अरे गुस्सा क्यों होते हो ……अच्छा ठीक है मैं कपडे उतारती हू

पर तुम धीरे-२ करोगे पहले वादा करो.” भैया :”अरे कल गलती से जोर से दब गया होगा …….मैं अब धीरे-२ ही करूँगा ,तुझे भी मज़ा आएगा ” भैया के ये कहते ही रीता ने अपनी शर्ट के बटन खोलने चालू कर दिए …….और लगातार भैया को देख कर मुस्कुराये जा रही थी| भैया क़ी आखे रीता की खुलती बटनों पर थी ……और उनकी आखो मैं अपनी जीत कि खुशी साफ दिख रही थी | भैया उस नवयुवती को एक आम का लालच देकर उसके अनमोल अंग के दर्शन करने वाले थे | भैया को लगातार देखता देखकर रीता के हाथ आखिरी बटन पर आकर रुक गया | भैया ने आशचर्य से कहा :”रुक क्यों गयी निकाल ना ” रीता : “मुझे शर्म आती है ” भैया उसकी बात सुनकर आगे बढे और आखिरी बटन को भी खोल दिया ओर पीछे कि तरफ ले जाकर उसकी शर्ट को उतार कर एक तरफ रख दिया | रीता ने शर्म ने नजरे झुका ली ……..उसके गाल सुर्ख लाल हो चुके थे ओर दोनों हाथो से उसने अपने सीना ढक लिया था | भैया ने उसकी तरफ देखा और प्यार से एक हाथ से उसके चेहरे को ऊपर किया ………रीता ने दोनों आखे अभी तक बंद कर रखी थी| भैया ने प्यार से उसके होटो पे किस किया रीता थोडा कसमसाई फिर उसने नजरे नीचे कर ली भैया ने प्यार से फिर से रीता का चेहरा ऊपर किया और अपने होठ रीता के होठो पे लगा दिए ,भैया ने रीता के सर को पीछे से पकड़ रख्खा था दोनों हाथो से | रीता कि आंखे अभी भी बंद थी पर उसने कोई विरोध नहीं किया इस बार भैया का साथ दे रही थी | थोड़ी देर के बाद भैया के हाथ रीता कि नंगे सीने पे घूमने लगे |

मैंने देखा रीता ने शर्ट के अंदर कुछ पहना नहीं था , सायद उसे जरुरत भी नहीं थी |रीता के सीने के उभार बहुत ही छोटे थे उसकी अरोला किसी ५० पैसे के सिक्के जितना बड़ी थी ओर उसपे छोटी सी निप्पल तो पता ही नहीं चल रही थी | भैया अभी भी रीता के होठो पे लगे थे अब तक भैया के हाथ रीता के सीने तक पहुच कर उसक़ी छोटी -२ चुचियो को मसलने लगे थे | भैया ने दो उंगलियों से रीता के छोटे से निप्पल को पकड़ कर मसला ,तो रीता के मुह से हल्की सी आह निकल गयी| रीता ने भैया के होठो से अपने होठ हटाकर कहा : “देखो तुमने कितना जोर से कल दबाया था अभी भी निशान पड़ा हुआ है ” भैया ने रीता के दोनों चुचियो को देखा तो पाया कि रीता कि बाई तरफ की चूची पे हल्के लाल कलर का निशान था जो उसके अरोला के बिलकुल पास में था |भैया ने उसपे हाथ फेरा और बोले :”अरे हा देख तो कैसे लाल सा हो गया है ,हो सकता है कल जोश में ज्यादा जोर से दब गए होंगे,लकिन आज ऐसा नहीं होगा तू चिंता मत कर . तुझे आज पूरा मजा दूँगा ” रीता को भी भैया की हरकतों की वजह से जोश आने लगा था ,उसकी साँसे धीरे-२ तेज होने लगी थी |भैया के हाथ अब तेजी से रीता की चुचियो पे चलने लगे थे , जब भैया थोड़ी जोर से दबाते तो रीता की आह निकल जाती |

थोड़ी देर ये खेल दोनों के बीच चलता रहां तभी मैंने देखा कि भैया अपने हाथ रीता के निचले भाग की तरफ ले जा रहे है उनके हाथ अभी रीता की नाभि तक पहुचे ही थे कि रीता ने भैया का हाथ पकड़ लिया ओर बोली :”वहा नही ऊपर से जितना करना है करो पर नीचे नहीं ” भैया रीता की बात सुनकर थोडा मुस्कुराये और रीता के स्तनों पे दूसरा हाथ फेरते हुए बोले : “अरे शर्माती क्यों है कुछ नहीं होगा ,देखना तुझे कितना मज़ा आयगा ” कहते हुआ भैया ने रीता की सलवार के नाडे को पकड़ लिया और खोलने का प्रयाश करने लगे | रीता अभी भी “नहीं-२ ” कर रही थी लेकिन इस बार उसने भैया के हाथ रोकने की कोशिश नहीं की | भैया ने रीता को बिस्तर पे लेटने को कहा | रीता बिना कोई सवाल किये बिना बिस्तर पे लेट गयी | अब भैया इतमिनान से रीता के सलवार के नाडे को खोलने लगे | रीता का एक हाथ उसके पेट पे था |  और दूसरे हाथ की उंगलियों को उसने अपने दातो तले दबा रखा था और पीछे की तरफ देख रही थी |बीच-२ में वो भैया की तरफ देख भी रही थी कि वो क्या कर रहे है | भैया इस बीच नाडे को खोलने में व्यस्त थे ….थोड़ी देर में झुझला के बोले :”कैसे बाधा है तुने ये तो खुल ही नहीं रही रहा है ” रीता ने नीचे की तरफ देखा और मुशकुरा कर बोली : ” अरे बेवकूफ ! ऊपर वाले को खिचो ,ज्यादा जोर मत लगाना वर्ना टूट जायेगा ” भैया ने फिर प्रयाश किया पर वो नहीं खोल नहीं पाए | इसपर रीता ने उठते हुए कहा :” रुको मैं खोलती हू नहीं तो तुम तोड़ दोगे ” भैया ने दोनों हाथ हटा लिए और रीता को नाडा खोलते देखने लगे | थोड़ी देर में ही रीता ने अपनी सलवार का नाडा खोल कर कहा :” तुम्हे तो एक नाडा भी खोलना नहीं आता ” भैया :” हा ठीक है , बस तू अब लेट जा मुझे मेरा काम करने दे ” रीता एक बार फिर बिस्तर पे पीठ के बल लेट गयी |

कहानी जारी है … अगले भाग में पढ़े आगे की कहानी 

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